मंगलवार, 12 जुलाई 2011

माफ कर देना..

दोस्तों मुझे माफ कर देना,
मैं साधारण इंसान था, दूर तक नहीं देख सकता था,
इसलिए जितनी दूर तक मेरा दिमाग जा सका मैंने बस उतना सोचा,
और बिना किसी कारण के सबके दिलों को खरोंचा,
सब कुछ अचानक हो गया, जीवन सीधे चलते चलते किसी जंगल में खो गया,
जंगल में अनजाने भय के शेर और चीतों ने मुझे दबोच लिया,
मैं अंधा,..... गुलाब को काँटा सोच लिया......
गुलाब को मेरी बेहयाई से पीड़ा पहुंची होगी....
ए दोस्तों गुलाब को बता देना,
मैं फूटी किस्मत वाला था,
उसको खुशबू और कोमलता का कद्रदान मिल जायेगा,
उसको समझा लेना,
ईश्वर के कोप का अधिकारी मै,
मुश्किल है मेरी पतवार खेना,
ऐ दोस्तों मुझे माफ कर देना....

2 टिप्‍पणियां:

  1. Q.1. yahan gulab se kavi ka kya tatparya hai?
    Q.2. kavi ne gulab ke sath kis prakar ki behayi ki?
    Q.3. gulab ko raundne ke baad bhi kavi swayam ko kyon futi kismat wala bata raha hai?

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  2. 1. Gulab ko maloom hai ki kavi use hi gulab kah raha hai.
    2. Gulab ko ye bhi maloom hai ki kavi kis behayayi ka jikra kar raha hai.
    3. Kavi ne gulab ko raunda nahi, kavi ne socha to gulab ka bhala hi hai, par usse kavi ka nuksaan hone ki poori sambhavna hai isiliye kavi khud ko footi kismat wala bata raha hai.
    P. s. tippanikarta gulab hi to nahi hai?

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